मैं ऐसी बन जाऊ
मौला तू रहम कर
मैं अपनी जिंदगी में
इतना तो कर पाऊं
छोटी लकीर के आगे
मैं बड़ी लकीर बन जाऊं
खामियों की लेन देन से
क्या हासिल होगा मुझे
तुझसे से अमीरी लेकर दिल की
अब फकीर ही बन जाऊं
लंबी काली रात के बाद
तूने उगाया हमेशा सूरज
रोशनी वाली अब तो मैं
नजर ही बन जाऊं
कोई नफरत लेकर आए गर
घर की चौखट पर
मैं अंदर से प्यार का
समंदर बन जाऊं
मुझे जो कुछ मिला अब तक
मेरी औकात से ज्यादा है
थोड़ी रुकावट आए गर तो मैं
सबर ही बन जाऊं
जमाना बदल गया मौला पर
बदला नहीं है तेरा प्यार
मैं तेरे प्यार को समझने वाली
कदर ही बन जाऊं
कोई भटका हुआ आएगा
मुझसे पता पूछने तो
तू मंजिल तू हमसफर
मैं तुझ तक जाने वाली
डगर ही बन जाऊं
अमृता
8 अप्रैल 2020

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